ग्वालियर
सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं । ऐसे में एक्सीडेंट का खतरा बढ़ गया है।  उल्लेखनीय है कि बारिश के कारण शहर की सड़कों का बुरा हाल हो गया है, पैच रिपेयरिंग न होने से धूल उड़ रही है। जलभराव के कारण जो सड़कें खराब हो गई हैं वहां पर पैचवर्क में कोल्ड डामर का इस्तेमाल न कर गिट्टी व मिट्टी से काम चलाया जा रहा है। ग्वालियर में सबसे अधिक सड़कें टूटी हैं। इनके कारण लगभग 20 फीसदी दुर्घटनाएं बढ़ीं।

उपचुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री भले ही दोनों हाथों से विकास की बयार बहा रहे है लेकिन राजनीतिक पावर गेम का ठिकाना बने इसी ग्वालियर में  सड़कें खस्ताहाल हैं। हकीकत यह है कि शहर का नागरिक हर रोज सड़कों के गड्ढों का दर्द झेलने को मजबूर है। इन सड़कों का जिम्मा नगर सरकार है, जो इसमें फेल साबित हो रही है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ग्वालियर में उपचुनाव वाली ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व और डबरा विधानसभा में करोड़ों रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे है। लेकिन पूरा शहर तो छोड़ो खुद निगम मुख्यालय की सड़क ही खस्ताहाल है।

ग्वालियर जिले में तीन विधानसभाओं में उपचुनाव होना है, इसके लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदौलत ही जनता वोट करती है।  जिले में तीन विधानसभाओं में उपचुनाव है, लेकिन सड़कों की ऐसी खस्ताहाल देखकर तो नेताजी को वोट नहीं चोट भी मिल सकती है।

ग्वालियर विधानसभा में उपनगर ग्वालियर की मुख्य सड़कों से लेकर शिंदे की छावनी, बहोड़ापुर, घोसीपुरा, नौगजा रोड, कोटेश्वर रोड से लेकर हजीरा,चार शहर का नाका तक मुख्य से लेकर अंदर तक सड़कों पर बड़े गड्ढे हैं और डामर निकला पड़ा है। नगर निगम मुख्यालय की मेन रोड ही खस्ताहाल है, बाकी का अंदाजा तो लगाया जा सकता है। मुरार, थाटीपुर, गोविंदपुरी इलाके से लकर सिटी सेंटर जैसे पॉश एरिया में सड़कों की हालत गांव जैसी हो गई है। ग्वालियर में केन्द्रीय मंत्री, सांसद, राज्यसभा सदस्य, दो मंत्री और नेताओं की लंबी लिस्ट है, तब भी ग्वालियर जिले की सड़कों का खस्ताहाल हैं।

 

Source : Agency