श्योपुर
 मध्य प्रदेश के श्योपुर में कोरोना पॉजिटिव  मरीज को लेने गई मेडिकल स्टाफ की टीम के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामाने आया है. घटना बीते रविवार की बताई जा रही है, जब कोरोना पॉजिटिव निकली ककरधा गांव निवासी महिला को कोविड वार्ड ले जाने उनके गांव 108 एंबुलेंस पहुंची थी. एंबुलेंस को ग्रामीणों द्वारा पत्थर और डंडे लेकर गांव से खदेड़ दिया गया, जिससे एंबुलेंस स्टाफ को अपनी जान बचाकर मरीज को लाए बगैर गांव से उल्टे पांव भागना पड़ा.

ककरधा गांव विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक (BJP MLA) सीताराम आदिवासी का गांव है. इसलिए प्रशासन अब मरीज को भर्ती कराने के लिए उनसे मदद मांग रहा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वायरल हुए वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हाथों में डंडे व पत्थर लेकर एंबुलेंस को गांव से खदेड़ रहे हैं. एंबुलेंस को खदेड़ने के पीछे की वजह यही है कि ग्रामीण कोरोना पॉजिटिव निकली महिला को कोविड वार्ड नहीं भेजना चाहते थे और इसी बात को लेकर उन्होंने एंबुलेंस को गांव में पहुंचते ही खदेड़ना शुरू कर दिया.

नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों के आक्रामक तेवर देखकर एंबुलेंस स्टाफ किसी तरह अपनी जान बचाकर लौट गया. एंबुलेंस स्टाफ कोरोना पॉजिटिव निकली महिला को कोविड वार्ड पहुंचाने में नाकामयाब रहा, लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन व पुलिस द्वारा ग्रामीणों पर कार्रवाई नहीं की गई है. गौरतलब है कि कोरोना पॉजिटिव निकले मरीजों को कोविड वार्ड में भर्ती कराए जाने की जिम्मेदारी एंबुलेंस स्टॉफ की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन की है. फिर भी देखा जा रहा है कि स्वास्थ्य और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने एंबुलेंस स्टॉफ पर ही यह जिम्मेदारी थोप रखी है. मामले में सीएमएचओ डॉ. बीएल यादव का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी मिली है. ग्रामीणों में इस तरह की भ्रांतियां हैं कि मरीज को अस्पताल न भेजें इस वजह से इस तरीके की दिक्कतें आ रही हैं. हमारी विधायक से बात हुई है. जल्द ही मरीज को कोविड वार्ड में भर्ती करा दिया जाएगा.

Source : Agency