भोपाल
विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम का कहना है कि विधानसभा सदस्यों के हितों का और विशेषाधिकार का किसी कीमत पर हनन नहीं होंने देंगे। लेकिन विशेषाधिकार का मतलब जनता के लिए उठने वाली आवाज से है, खुद का विशेषाधिकार नहीं, व्यक्ति का विशेषाधिकार नहीं, व्यक्ति का हित नहीं जनता के लिए जो उसका हित निहित है जो विशेषाधिकार है उसे गड़बड़ नहीं होने देंगे।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कल सदन के भीतर अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद उन्हें बधाई देते हुए यह आग्रह किया था कि विधानसभा के जो सदस्य है उनके अधिकार असीमित है। उनके अधिकार प्रदेश के मुख्य सचिव से अधिक है लेकिन कई बार यह देखने में आता है कि नायब तहसीलदार, तहसीलदार और पुलिस प्रशासन के नुमाइंदे उनसे जिस लहजे में बात करते है वह सम्मानजनक नहीं होती है। उन्होंने नये अध्यक्ष से आग्रह किया था कि वे इसके लिए नियम बना रहे थे लेकिन यह काम पूरा नहीं हो पाया और उन्होंने नये अध्यक्ष से अपेक्षा की थी कि वे इसके लिए नियम बनाए। इसके जवाब में नवागत अध्यक्ष गिरीश गौतम ने यह बात कहीं कि जनता के लिए उठने वाली आवाज से जुड़े किसी भी विशेषाधिकार का हनन किसी भी हालत में नहीं होने दिया जाएगा।

विधानसभा की परंपराओं के गौरवशाली इतिहास को बनाए रखने के लिए वे क्या कदम उठाएंगे। इसको लेकर गौतम का कहना था कि हमारे नये विधायक जनहित के मुद्दे अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दे सदन में कैसे उठाए इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। लेकिन अक्सर विधायकों को जब अधिकारी प्रशिक्षण देने आते है तो वे यह सोचते है कि वे अधिकारियों से उपर है उनसे कैसे प्रशिक्षण ले तो इसके लिए हमने यह सोचा है कि सदन में इस समय बीस से पच्चीस साल कउे कार्यकाल वाले सदस्य है। संसदीय परंपराओं के जानकार विधायक, पूर्व अध्यक्ष मौजूद है। उनके अनुभवों का लाभ हम विधायकों के प्रशिक्षण के लिए लेंगे।

सदन कम चलने, बैठके कम होने और जनहित के मुद्दों पर चर्चा ना हो पाने के चलते आगे सत्र की अवधि बढ़ाने को लेकर वे क्या सोचते है इसपर उनका कहना था कि सत्र की अवधि ज्यादा हो, ज्यादा विषय उठाने के अवसर मिले यह महत्वपूर्ण नहीं है। सदस्यों द्वारा जो विषय सदन में उठाए जा रहे है वे कैसे है, कितने महत्व के है,उनमें कितना अधिक जनहित है यह महत्वपूर्ण है।

सदन के भीतर होने वाली टोका-टाकी को कम करने के लिए वे क्या सोचते है इसको लेकर उनका कहना है की हम सभी इंसान है कोई कम्प्यूटर नहीं है कि जो बटन दबाया वही चलेगा। सदन में हास-परिहास जरुरी है। यह चलता रहेगा। जिस तरह अध्यक्ष को सर्वसम्मति से चुना गया है क्या उसी तरह उपाध्यक्ष भी सर्वसम्मति से चुना जाएगा और विपक्ष को यह पद दिया जाएगा इसको लेकर उनका कहना था कि यह उनका विषय नहीं है इसलिए इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

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