रायपुर। छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जंगलों में पिछले दिनों गोली लगने से मृत आदिवासी झामसिंह के परिजनों को 4 लाख रुपये की स्वेच्छानुदान की राशि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वनमंत्री मोहम्मद अकबर के कहने पर स्वीकृत कर दिए हैं। जल्द ही ये राशि उनके परिजनों को दे दी जाएगी। इससे पहले प्रशासन ने झामसिंह धुर्वे के परिजन को एक लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इससे पहले मामले के तूल पकड़ने के बाद मप्र शासन जागी और घटना में 302 का मुकदमा दर्ज करते हुए मामले को सीआईडी को सौंंप दिया है। गौरतलब है कि कबीरधाम जिले के बालसमुंद (बोड़ला) निवासी झामसिंह धुर्वे की बीते 6 सिंतबर को बालाघाट सीमा में मध्यप्रदेश पुलिस के एनकाउंटर के दौरान मृत्यु हो गई थी। जबकि उसके साथी नेम सिंह की जान बाल-बाल बची। उसको मारी गई गोली उसे छूती हुई निकल गई। नेमसिंह ने मामले को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई जिसके बाद मोहम्मद अकबर ने घटना की जांच के आदेश दिए। 
इधर, मध्यप्रदेश पुलिस ने घटना को नक्सली मुठभेड़ करार दे दिया। इस घटना से नाराज़ आदिवासी समाज ने आवाज़ उठाई। छत्तीसगढ़ के वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखकर नाराज़गी ज़ाहिर की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसूईया उइके से बात की। अनुसुईया उइके ने फौरन मप्र के राज्यपाल से बात करके घटना से अवगत कराया। इधर, आदिवासी समाज सड़क पर उतर आया। चुनावी तैयारी में जुटी मप्र सरकार को समझ में आ गया कि मामला बिगड़ रहा है लिहाज़ा उसने मामले को सीआईडी को सौंप दिया है और 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। हालांकि आदिवासी समाज अब भी आक्रोशित है।

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