46 साल से वकालत करने वाले एमएल लाहोटी को सुप्रीम कोर्ट में एंट्री के लिए बनवानी पड़ी पर्ची

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में 46 साल से प्रैक्टिस करने वाले सीनियर एडवोकेट एमएल लाहोटी गुरुवार को फिजिकल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के लिए एंट्री कार्ड होने के बावजूद पास के लिए लाइन लगने को मजबूर हुए। जब सुप्रीम कोर्ट के सामने उन्होंने यह मुद्दा उठाया तो कोर्ट ने कहा कि वह रजिस्ट्रार को इस मुद्दे को देखने के लिए कहेंगे।

सीनियर एडवोकेट लाहोटी ने नवभारत टाइम्स को बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस विनित शरण की अगुआई वाली बेंच के सामने वह वर्चुअल पेश हुए थे। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने कहा था कि मेट्रो, मार्केट आदि खुल चुके हैं तो क्यों न फिजिकल सुनवाई के लिए वकील पेश हों। इस पर लाहोटी ने कहा कि वह अगली स्पेशल सुनवाई में फिजिकल तौर पर कोर्ट में पेश होकर दलील पेश करेंगे। इसी सिलसिले में गुरुवार को वह सुप्रीम कोर्ट में आए।

सुप्रीम कोर्ट में 46 साल से वह प्रैक्टिस में हैं और उनके पास सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी एंट्री कार्ड भी है जिसे दिखाकर वह सुप्रीम कोर्ट में अंदर जाते रहे हैं। लेकिन कोरोना काल में सुप्रीम कोर्ट में पेशी के लिए पास काउंटर से पर्ची जारी की जा रही है और सीनियर एडवोकेट लाहोटी को भी पास के लिए लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा और फोटो खिंचवाने पड़े।

इस मुद्दे को लाहोटी ने सुप्रीम कोर्ट में पेशी के बाद उठाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट उनका है। वह 46 साल से यहां प्रैक्टिस में हैं। उनके पास एंट्री कार्ड है लेकिन बावजूद इसके उन्हें एंट्री के लिए पास बनवाने के लिए लाइन में लगना पड़ा। अगर इस तरह से होता रहा तो वह आने वाले दिनों में फिजिकल सुनवाई में पेश नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि एक तरह से उन्हें प्रताड़ना से गुजरना पड़ा। जस्टिस शरण की बेंच ने लाहोटी की इस गुहार पर कहा कि वह रजिस्ट्रार को कहेंगे कि इस मुद्दे को देखें।