बरगी बांध में 7 साल सेरिसाव, जांच टीम की चेतावनी – ‘बड़ी आपदा’ का कारण बन सकता है

जबलपुर
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने रानी अवंती बाई सागर परियोजना (बरगी बांध) की गैलरी से लगातार हो रहे पानी के रिसाव को गंभीर खतरा बताया है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) को तीन दिन पहले सौंपी रिपोर्ट में संयुक्त जांच दल ने अनेक सवाल उठाए हैं। साथ ही एनवीडीए को नोटिस देकर 30 दिनों में जवाब मांगा है। निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्या निकला रिपोर्ट में
रिपोर्ट के अनुसार बरगी बांध के रखरखाव, निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर खामियां हैं। टीम ने माना है कि बांध की स्थिति से लेकर खतरे तक को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बांध की मैसनरी स्पिलवे गैलरी से वर्ष 2018 से रिसाव बना हुआ है। सात वर्षों बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। इस पर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण ने एनवीडीए को चेतावनी दी है कि इतने लंबे समय तक रिसाव को नजरअंदाज करना बांध की संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर सकता है और भविष्य में बड़ी आपदा का कारण बन सकता है।
निगरानी तंत्र कमजोर
रिपोर्ट में बांध के सुरक्षा वर्गीकरण को भी भ्रामक बताया गया है। निरीक्षण दल के अनुसार, बरगी बांध को मामूली कमियों की श्रेणी में रखना वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। रिसाव के दबाव और व्यवहार को मापने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रभावी निगरानी प्रणाली का अभाव है। साथ ही, अति-संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की आवाजाही जारी है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा ने भी इसे लाखों लोगों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ बताया है।
अधिकारियों का क्या कहना
राजेश सिंह, ईई, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने सितंबर 2025 में निरीक्षण किया था। कुछ कमियां निकाली हैं, जिनका सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद जांच करवाकर हम पता करेंगे कि कहां-कहां से पानी की रिसाव हो रहा है।




