राजस्थान में ‘लेडी सिंघम’ IPS डॉ. प्रीति चंद्रा रिटर्न्स!, भजनलाल सरकार ने दी आईजी की ज़िम्मेदारी

जयपुर.
राजस्थान कैडर की सबसे तेज-तर्रार महिला पुलिस अधिकारियों में शुमार डॉ. प्रीति चंद्रा एक बार फिर एक्शन मोड में लौटने को तैयार हैं। दरअसल, सोमवार देर रात को जारी 21 आईपीएस अफसरों की तबादला सूची में डॉ चंद्रा का नाम भी शामिल है। भजनलाल सरकार ने उन्हें डीआईजी (आर्म्ड बटालियन) से पदोन्नत कर आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) नियुक्त किया है। यह पद पुलिस महकमे में रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिम्मा सीधे तौर पर इसी पद के इर्द-गिर्द घूमता है।
क्यों कहा जाता है 'लेडी सिंघम'?
- प्रीति चंद्रा का नाम सुनते ही चंबल के बीहड़ों के डकैतों से लेकर मानव तस्करी करने वाले गिरोहों तक के पसीने छूट जाते हैं। उन्हें यह खिताब उनके काम और उनकी दबंग छवि के कारण मिला है।
- बीहड़ों में दबिश: करौली में एसपी रहते हुए उन्होंने चंबल के दुर्गम बीहड़ों में घुसकर डकैतों का पीछा किया। उनके डर से हरिया गुर्जर जैसे 10 हजार के इनामी डकैत और कई अन्य खूंखार अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
- देह व्यापार पर प्रहार: बूंदी में तैनाती के दौरान उन्होंने देह व्यापार के नरक में फंसी दर्जनों नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया और गिरोह के सरगनाओं को सलाखों के पीछे भेजा।
कौन हैं डॉ. प्रीति चंद्रा? (पारिवारिक पृष्ठभूमि)
प्रीति चंद्रा राजस्थान के सीकर जिले के कुंदन गांव की रहने वाली हैं। उनका जन्म 1979 में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनकी सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी मां कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को 'सिंघम' बनाने के लिए समाज के हर दबाव का सामना किया।
सफर: पत्रकारिता से पुलिस सेवा तक की 10 बड़ी बातें
- शिक्षिका से शुरुआत: IPS बनने से पहले प्रीति चंद्रा एक स्कूल शिक्षिका थीं। उन्होंने बीएड और एमफिल की डिग्री हासिल की है।
- पत्रकार बनने का सपना: जयपुर में एक लोकल केबल टीवी चैनल में न्यूज़ रीडर भी रहीं। उनका शुरुआती सपना एक पत्रकार बनने का था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
- बिना कोचिंग पहली बार में सफलता: उन्होंने 2008 में बिना किसी भारी-भरकम कोचिंग के, अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा क्रैक की और 255वीं रैंक हासिल की।
- बीकानेर की पहली महिला एसपी: प्रीति चंद्रा के नाम बीकानेर की पहली महिला पुलिस अधीक्षक (SP) होने का गौरव दर्ज है।
- चंबल के डकैतों का काल: करौली एसपी के रूप में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई पुरुष अधिकारी नहीं कर पाए— बीहड़ों के डकैत गिरोहों का सफाया।
- मानव तस्करी के खिलाफ जंग: बूंदी और अलवर में उनकी तैनाती के दौरान मानव तस्करी गिरोहों पर की गई कार्रवाई आज भी मिसाल दी जाती है।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: उन्होंने एसीबी (ACB) कोटा में भी अपनी सेवाएं दीं, जहाँ उन्होंने कई भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा।
- अधिकारियों की जासूसी का मामला: बीकानेर में तैनाती के दौरान जब एक दरोगा ने उनकी जासूसी करने की कोशिश की, तो उन्होंने उसे तुरंत पकड़वाकर जेल भिजवाया, जिससे विभाग में उनकी धाक जम गई।
- सादगी और सख्त अनुशासन: वे फील्ड में जितनी सख्त हैं, व्यक्तिगत जीवन में उतनी ही सरल और अनुशासित मानी जाती हैं।
- मुख्यधारा में वापसी: पिछले कुछ समय से वे तुलनात्मक रूप से शांत पदों (जैसे आर्म्ड बटालियन) पर थीं, लेकिन अब IG लॉ एंड ऑर्डर के रूप में उनकी 'पावरफुल' वापसी हुई है।




