पंचकूला के जंगल में काट डाले हजारों पेड़, तस्करों पर एक्शन की तैयारी में विभाग

बरवाला.
आसरेवाली क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में आज दोपहर 1 बजे चार सदस्यों की टीम मौके पर पहुंची। टीम शाम 4 बजे तक कई घंटों तक जंगल के भीतर सघन छानबीन की और कटे हुए पेड़ों के ठूंठ व अन्य साक्ष्यों को खंगाला। अब पूरी कार्यवाही टीम की इसी जांच रिपोर्ट पर टिकी है।
बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यह खैर की कटाई कुछ दिनों में नहीं हुई बल्कि लंबे समय से चल रही थी। ऐसे में सवाल उन अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों पर भी उठ रहा है जिनकी जिम्मेदारी इस वाइल्डलाइफ सेंचुरी की रखवाली करने की थी। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र पहले वन विभाग के अधीन था, लेकिन वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी का दायरा बढ़ने के बाद इसे वाइल्डलाइफ विभाग के अधीन कर दिया गया था।
जब यह क्षेत्र वन विभाग के पास था, तब गांव आसरेवाली के बाहर एक नाका लगाया गया था, जहां नियमित चेकिंग होती थी। बताया जा रहा है कि क्षेत्र वाइल्डलाइफ के अधीन आते ही नाका हटा दिया गया, जिसके बाद खैर की तस्करी तेजी से बढ़ने लगी। यह खेल कुछ दिनों का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा है और इसमें हजारों पेड़ों की कटाई की आशंका जताई जा रही है। हैरानी की बात यह भी है कि क्षेत्र में कथित रूप से खनन गतिविधियां भी जारी रहती हैं, जबकि एरिया में प्रवेश से पहले कोई स्थायी नाका या चेकिंग व्यवस्था नहीं है। संबंधित इलाके में तीन से चार खोल बने हुए बताए जा रहे हैं, जहां सबसे अधिक खैर के पेड़ काटे गए हैं।
अक्टूबर 2025 में भी वायरल हुई थी फोटो, पर नहीं हुई कार्रवाई
अक्टूबर 2025 में भी इंटरनेट मीडिया पर आसरेवाली में खैर के कटे हुए पेड़ों की करीब 30 फोटो वायरल हुई थी, लेकिन तब इन चीजों की जांच नहीं की गई। इसके बाद से लगातार खैर चोरी के मामले बढ़ते गए। अब जाकर जब मामला मंत्री के संज्ञान में पहुंचा है, तो विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। आज टीम की घंटों चली इस छानबीन के बाद अब रिपोर्ट का इंतजार है कि विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है।
कल 10 टीमों के पहुंचने की संभावना
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग अब बड़े स्तर पर एक्शन की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कल सुबह क्षेत्र में 10 अलग-अलग टीमों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो पूरे प्रभावित इलाके का कोना-कोना खंगालेंगी।




