देश

भारत को होर्मुज की जरूरत नहीं! अर्जेंटीना के बाद एक और दोस्त भेजेगा LNG-LPG भरकर जहाजों में

मुंबई 

 ईरान युद्ध के लंबा खिंचने की पूरी आशंका है. अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर अटैक किया था, तब दावा किया गया था कि यह जंग कुछ ही हफ्तों में समाप्‍त हो जाएगी. हालांकि, ऐसा हुआ नहीं. ईरान की ओर से अभी तक ऐसा पलटवार किया गया है, जिसकी आशंका अमेरिका-इजरायल को तो छोड़िए पूरी दुनिया को नहीं थी. इसका व्‍यापक असर देखने को मिल रहा है. खासकर एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्‍ट्रेट के बाधित होने से पेट्रोल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे में तमाम देश अब होर्मुज स्‍ट्रेट के साथ ही तेल और गैस से संपन्‍न खाड़ी के देशों का विकल्‍प तलाशने लगे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटिना भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सामने आया है. अब नई दिल्‍ली ने अपने दशकों पुराने परंपरागत मित्र देश रूस से LNG और LPG सप्‍लाई को लेकर बातचीत की है. रिपोर्ट की मानें तो भारत और रूस LNG की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार हैं. ऐसे में तमाम संकट के बावजूद भारत के घरों में चूल्‍हे जलते रहेंगे, फिर होर्मुज जलडमरूमध्‍य लंबे समय के लिए बाधित ही क्‍यों न रहे। 

रूस की न्‍यूज एजेंसी TASS ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नई दिल्‍ली और मॉस्‍को LNG की सप्‍लाई बढ़ाने को तैयार हैं. रिपोर्ट की मानें तो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत और रूस के बीच LNG और LPG की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर बातचीत तेज हो गई है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, दोनों देशों ने LNG की सप्लाई बढ़ाने की तत्परता जताई है. साथ ही भारत को LPG की आपूर्ति की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है. तेल और गैस क्षेत्र के एक सूत्र ने बताया कि भारत और रूस के बीच हुई हालिया चर्चाओं में ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी है. सूत्र के मुताबिक, दोनों पक्षों ने LNG की आपूर्ति बढ़ाने की इच्छा जताई है और भारत में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली LPG की सप्लाई पर भी चर्चा की है. भारत में घरेलू ईंधन के रूप में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में रूस एक अहम आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है। 

ऑप्‍शन की तलाश
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है. ऐसे में रूस के साथ बढ़ता ऊर्जा सहयोग भारत की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप माना जा रहा है. हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध और मजबूत हुए हैं. सूत्र ने यह भी संकेत दिया कि इस दिशा में आगे की बातचीत में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. उन्‍होंने बताया कि व्यापार जगत की भागीदारी के साथ वार्ता जारी रहने की उम्मीद है. इससे दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं. गौरतलब है कि भारत पहले ही अर्जेंटीना समेत अन्य देशों से LNG आयात के विकल्प तलाश रहा है. ऐसे में रूस के साथ यह संभावित समझौता भारत के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति को और मजबूती देगा. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है। 

संकट में सामने आया अर्जेंटिना
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत में उत्पन्न LPG की कथित कमी के बीच करीब 20,000 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि देश के लगभग 60 प्रतिशत LPG आयात इसी मार्ग से होते हैं. समुद्री यातायात बाधित होने के चलते भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से कदम उठाने पड़े हैं. इसी के तहत अर्जेंटीना एक अहम साझेदार के रूप में उभरा है. भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मैरियानो ऑगस्‍टीन कॉसिनो (Mariano Agustin Cousino) ने कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास पर्याप्त गैस भंडार हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसे और गति दे सकती हैं। 

खूब बढ़ी LPG की सप्‍लाई
साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन LPG निर्यात किया, जो पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुने से भी अधिक है. इनमें से लगभग 39,000 टन आपूर्ति अर्जेंटीना के बहिया ब्लांका पोर्ट से भारत पहुंच चुकी थी, जबकि 5 मार्च को अतिरिक्त 11,000 टन भेजा गया. गौरतलब है कि 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को LPG की आपूर्ति नहीं की थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत का अर्जेंटीना जैसे दूरस्थ देशों के साथ सहयोग बढ़ाना उसकी व्यावहारिक और दूरदर्शी ऊर्जा नीति को दर्शाता है. यह साझेदारी न केवल मौजूदा संकट का समाधान है, बल्कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत रणनीतिक संबंध की नींव भी रखती है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button