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यूपी में डिजिटल जनगणना का शंखनाद, 7 मई से शुरू होगा पहला चरण, पूछे जाएंगे 33 सवाल

पटना
उत्तर प्रदेश में जल्द ही जनगणना शुरू होने जा रही हैं. इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर गणना करेंगे.

उत्तर प्रदेश में जनगणना की तारीख आई सामने
उत्तर प्रदेश में साल 2027 की जनगणना शुरू होने जा रही है. इस बार ये पहली बार होगा जब जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा जुटाने, उनकी एंट्री, सत्यापन और निगरानी समेत सभी काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाएंगे. लोगों को स्व-गणना का भी ऑप्शन दिया जाएगा यानी वोटर स्वयं अपना डेटा जमाकर करे जनगणना में शामिल हो सकेंगे.

उत्तर प्रदेश में दो चरणों में जनगणना कराई जाएगी पहले चरण में मकान का सूचीकरण एवं मकान की गणना का काम होगा जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना कराई जाएगी. पहले चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी, इसके बाद अधिकारी 22 मई से 20 जून घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. दूसरे चरण में ही जातिगत गणनी की जाएगी.
जनगणना में इन सवालों के देने होंगे जवाब
जनगणना के पहले चरण में मकान का सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी. इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनकी जानकारी लोगों को गणना के लिए आए अधिकारियों को देनी होगी.

1. भवन नंबर या जनगणना नंबर
2. मकान नंबर
3. मकान के फर्श में इस्तेमाल प्रमुख सामग्री. यानी कि फर्श सीमेंट का है, ग्रेनाइट है, मार्बल है.
4. मकान के दीवार में इस्तेमाल सामग्री
5. मकान की छत में इस्तेमाल सामग्री
6. मकान का इस्तेमाल
7. मकान की हालत
8. परिवार क्रमांक
9. परिवार के सदस्यों की संख्या
10. परिवार के मुखिया का नाम
11. परिवार के मुखिया का लिंग
12. जाति, सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी.
13. मकान के स्वामित्व की स्थिति
14. मकान में कमरों की संख्या
15. विवाहित दंपतियों की संख्या
16. पेयजल का सोर्स
17. पेयजल की उपलब्धता
18. बिजली का सोर्स
19. शौचालय की उपलब्धता
20. शौचालय का प्रकार
21. गंदे पानी की निकासी
22. स्नानघर की उपलब्धता
23. गैस कनेक्शन
24. खाना पकाने का मुख्य ईंधन
25. रेडियो या ट्रांजिस्टर
26. टीवी
27. इंटरनेट की सुविधा
28. लैपटॉप या कंप्यूटर
29. टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्ट फोन
30. साइकल, स्कूटर, मोटरसाइकल
31.कार, जीप, वैन
32. मुख्य अनाज
33. मोबाइल नंबर

उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. ये कर्मचारी लोगों के घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगे और सारा डेटा जुटाएंगे. ये डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर पर एक नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा.  

 

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