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भारत की मिसाइल ताकत होगी और मजबूत: हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी अपग्रेड में जुटे वैज्ञानिक, Prahlada Ramarao पहुंचे हिसार

हिसार.

अगर युद्ध के मैदान में भारत का वर्चस्व कायम रखना है तो हमें अमेरिका, ब्रिटेन, इटली व फ्रांस जैसे देशों की सुपर हाइपरसोनिक मिसाइलों को चकमा दे नष्ट करने वाली एंटी-बैलिस्टिक राकेट की जरूरत है। इसके लिए भारतीय वैज्ञानिक मिसाइलों को अपग्रेड करने के लिए 3 बिंदुओं पर काम कर रहे हैं, जिनमें रफ्तार-घुमावदार व ब्रेन सिस्टम शामिल है।

ये बात पद्मश्री वैज्ञानिक डा. प्रह्लादा रामाराओ ने कही। वे शुक्रवार को गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय स्थित चौधरी रणबीर सिंह आडिटोरियम में आयोजित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। दैनिक जागरण के संवाददाता ने उनसे बातचीत की, जिसमें उन्होंने ब्राह्मोस व आकाश मिसाइलों के परीक्षण से लेकर भविष्य की तैयारियों को लेकर कई जानकारियां साझा भी की।

सेना ने की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों की डिमांड
मुख्यातिथि एवं पद्मश्री वैज्ञानिक डा. प्रह्लादा रामाराओ ने बताया कि 1985 में भारत का बांग्लादेश के साथ विवाद चल रहा था। जिसमें बांग्लादेश ने कुछ मिसाइलों से भारत में अटैक किए। जिसको रोकने के लिए भारतीय सेना ने सरकार से एडवांस एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों की डिमांड की थी। तब सरकार ने हाई लेवल की मीटिंग बुलाई, जिसमें सेना, वैज्ञानिक, नीति आयोग सहित अन्य क्षेत्रों के टाप अधिकारी मौजूद रहे। जिसमें थल व वायु सेना के टाप अधिकारियों ने मिसाइलों का ड्राफ्ट तैयार कर वैज्ञानिकों की टीम को दिया। इस दौरान टीम में डा. एपीजे अब्दुल कलाम भी मौजूद रहे।

ब्राह्मोस व आकाश मिसाइलों ने एकसाथ हिट किए थे तीन टारगेट
मुख्यातिथि ने बताया कि ब्राह्मोस व आकाश मिसाइल बनाने में करीब 10 साल लगे। 1995 में ब्राह्मोस व आकाश मिसाइल का पहला परीक्षण किया गया। इस दौरान थल व वायु सेना के टाप अधिकारी मौजूद थे। दोनों मिसाइलों ने मात्र 5 सेकेंड के अंदर एकसाथ तीन टारगेट को हिट किया।

रूस के साथ तैयार की मिसाइल
पद्मश्री वैज्ञानिक डा. प्रह्लादा ने बताया कि ब्राह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने के लिए 15 साल का समय मांगा गया था। लेकिन रूस ने भारत के साथ मिलकर जेवी टीम बनाई, जिसमें दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर 5 साल के अंदर ही ब्राह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तैयार की।

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