विदेश

ईरान ने स्वीकार किया 14 प्वाइंट प्रस्ताव, क्या अब खत्म होगी जंग? डोनाल्ड ट्रंप हुए गदगद

तेहरान 
फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध ने पूरे पश्चिम एशिया को हिला दिया है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई. काफी कोशिशों के बाद अब मई, 2026 में ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 14 पॉइंट प्रस्ताव भेजा है, जिसमें दूसरे प्रमुख बिंदु पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए नई व्यवस्था की मांग की गई है. यह प्रस्ताव ईरान के युद्ध में झुकने या कम से कम समझौते की दिशा में कदम का संकेत माना जा रहा है। 

ईरानी स्टेट मीडिया तस्नीम और फार्स के मुताबिक, यह 14 पॉइंट का प्लान अमेरिका के 9 पॉइंट प्रस्ताव का जवाब है. इसमें शामिल मुख्य मांगों में – 30 दिन में युद्ध समाप्ति, भविष्य में आक्रमण न होने की गारंटी, अमेरिकी बलों की वापसी, नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, फ्रोजन एसेट्स रिलीज, प्रतिबंध हटाना, लेबनान में लड़ाई बंद करना और होर्मुज के लिए नई व्यवस्था शामिल है। 

होर्मुज को लेकर क्या चाहता है ईरान?
ईरान होर्मुज खोलने को तैयार है, लेकिन बदले में अमेरिका अपनी नाकाबंदी हटाए और हमले न करने की गारंटी दे. परमाणु कार्यक्रम को बाद के लिए टाला गया है. ईरान ने अमेरिका को दिए 14 पॉइंट प्रस्ताव के एक प्रमुख बिंदु में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए नई शासन व्यवस्था या नई गवर्निंग मैकेनिज्म की मांग की है। 

होर्मुज का सामरिक महत्व स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और गैस का मार्ग है. ईरान ने फरवरी के बाद से इसे ब्लॉक कर दिया, जहाजों पर हमले किए और टोल वसूला. इससे ग्लोबल फ्यूल क्राइसिस पैदा हुआ. अमेरिका ने जवाब में ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक ब्लॉकेड लगा दिया, जिससे ईरान की ऑयल रेवेन्यू बुरी तरह प्रभावित हुई. अब ईरान नई व्यवस्था की बात कर रहा है, जो उसके पूर्ण नियंत्रण से हटकर साझा या गारंटीड व्यवस्था की ओर इशारा करता है. यह ईरान की मजबूरी को दर्शाता है। 

आखिर क्यों झुक रहा है ईरान?

    आर्थिक दबाव: ब्लॉकेड से ऑयल एक्सपोर्ट रुक गया, अर्थव्यवस्था चरमरा रही है.
    सैन्य क्षति: निरंतर हमलों से इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट, IRGC को नुकसान.
    क्षेत्रीय अलगाव: लेबनान, यमन जैसे प्रॉक्सी फ्रंट्स पर दबाव.
    वैश्विक अलगाव: चीन और रूस भी पूर्ण समर्थन नहीं दे पा रहे.

ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव की समीक्षा की, लेकिन इसे अस्वीकार्य बताया. ट्रंप ने कहा कि ईरान ने मानवता के खिलाफ 47 साल की क्षति का पर्याप्त मूल्य नहीं चुकाया. फिर भी बातचीत जारी है और तीन सप्ताह का सीजफायर होल्ड पर है. ईरान ने पहले की तुलना में नरम रुख अपनाया है, जिसमें होर्मुज को पहले चरण में रखा और न्यूक्लियर को बाद में. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह ईरान की रणनीतिक तौर पर पीछे हटने की नीति है. अगर समझौता होता है, तो होर्मुज खुलने से तेल कीमतें गिरेंगी और ग्लोबल सप्लाई चेन सामान्य होगी, लेकिन ट्रंप की बिग एनफ प्राइस वाली लाइन और ईरान की मुआवजे की मांग में गैप है. वहीं IRGC कमांडर ने नई लड़ाई की चेतावनी भी दी है, जो आंतरिक दबाव दिखाता है। 

ईरान का 14 पॉइंट का प्रस्ताव ईरान की युद्ध थकान को उजागर करता है. ये पूर्ण हार नहीं, लेकिन मजबूरी से समझौते की ओर बढ़ना स्पष्ट है. आने वाले दिनों में पाकिस्तान मध्यस्थता और ट्रंप की प्रतिक्रिया निर्णायक होगी. ईरान अब झुकने की बजाय समझौते की भाषा बोल रहा है तो यह युद्ध का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button