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सतलुज नदी से गाद निकालने को हाई कोर्ट की मंजूरी, फैसले के बाद संघर्ष समिति ने उठाए सवाल

 रूपनगर
 सतलुज नदी पर स्थित अगमपुर पुल के निकट डी-सिल्टिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ताजा आदेशों को लागू करने से पहले विभाग को मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए व कानून और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही कार्य किया जाना चाहिए। जिससे आगामी बरसाती मौसम में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान का सामना न करना पड़े।

ये मांग संघर्ष समिति के सदस्यों ने करते हुए कहा कि प्रशासन पहले इस क्षेत्र का सीमांकन कर उसे पूरी तरह स्पष्ट करे और तारबंदी करने के बाद ही डी-सिल्टिंग का कार्य शुरू किया जाए।

जिससे कि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। संघर्ष समिति ने यह भी सवाल उठाया कि सतलुज नदी का पानी पुल के पिल्लर नंबर-1 की ओर ही अधिक दबाव के साथ क्यों बह रहा है।

क्या इसका कारण पुल के ऊपरी क्षेत्र में पूर्व में हुए अवैध खनन के कारण नदी की प्राकृतिक धारा का बदल जाना है। यदि ऐसा है तो विभाग इस तथ्य को सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है।

30 जून को दी गई थी डी-सिल्टिंग की अनुमति
सदस्यों ने करते हुए कहा कि 8 जून को दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश में संशोधन करते हुए हाईकोर्ट ने पुल के पिलर नंबर-1 की मरम्मत व पुल से 35 से 50 मीटर अपस्ट्रीम तक सीमित क्षेत्र में 30 जून 2026 तक डी-सिल्टिंग की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 जून के बाद न्यायालय की अनुमति के बिना किसी प्रकार की डी-सिल्टिंग नहीं की जाएगी।

इसके साथ ही रूपनगर के उपायुक्त को स्वयं मौके पर निगरानी रखने, अवैध खनन पर रोक सुनिश्चित करने व अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अदालती आदेश के बाद संघर्ष समिति ने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार और संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सार्वजनिक करने चाहिए।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरदेव सिंह माजरी टिब्बा, यशवीर चंद भलाण, पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, एडवोकेट विशाल सैनी, सुरजीत सिंह ढेर, बलवीर सिंह शाहपुर, कीर्ति किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बड़वा, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता धर्मपाल सैनी माजरा व निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुख बाबा अच्छर सिंह महाकाल ने संयुक्त रूप से कहा कि विभाग द्वारा अदालत के समक्ष नए खसरा नंबर प्रस्तुत किए गए हैं। ऐसे में सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाए कि पुल से 35 से 50 मीटर तक डी-सिल्टिंग का वास्तविक क्षेत्र कौन-सा है।

2020 की पीडब्ल्यूडी विभाग की रिपोर्ट पर सरकार ने क्या कार्रवाई की
पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने वर्ष 2020 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय स्वयं विभाग ने स्वीकार किया था कि अवैध खनन के कारण पुल के पिलर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे और पुल की सुरक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित करने की सिफारिश की गई थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि उस रिपोर्ट के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की, समिति का गठन हुआ या नहीं और पिछले छह वर्षों में पुल की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए।

उन्होंने मांग की कि यदि वर्ष 2020 में पिल्लर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे तो वर्ष 2026 में उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही पुल की वर्तमान स्थिति, नदी की जलधारा की दिशा तथा डी-सिल्टिंग के संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी भी जनता के सामने रखी जाए।

 

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