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यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी

यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी

60 करोड़ रुपये से लागू होगी बीमा योजना, 85 प्रतिशत प्रीमियम देगी सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान

महामारी, दैविक आपदा और आकास्मिक दुर्घटना से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा, 2.28 लाख से अधिक पशु आएंगे दायरे में

पशुओं की मौत या अपंगता पर नहीं होगा आर्थिक संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

लखनऊ, 
 सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है।

इन स्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ
योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 प्रतिशत तक भुगतान
प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

2.28 लाख से अधिक पशुओं को होगा बीमा
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को अंशदान के रूप में देनी होगी।

धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 प्रतिशत का योगदान है। प्रदेश में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 प्रतिशत से अधिक है। पशुधन का इसमें विशेष योगदान है। पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 75 जिलों में लागू होगी। राज्यांश 85 प्रतिशत (इसमें केंद्र का हिस्सा 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत शामिल) और लाभार्थी का अंश 15 प्रतिशत होगा। योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा। इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा।

यूपी के गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित
मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है। प्रदेश में 7,500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।

शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा 'परशुरामपुरी'

नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर को मिलेगी नई आधिकारिक पहचान

अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा नाम परिवर्तन का निर्णय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से जनपद शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के बाद संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा।

भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है जलालाबाद
जनपद शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद राज्य सरकार ने नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।

अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधी भर्ती में मिलेंगे अधिक अवसर

विभागों के चिह्नित पदों को शामिल किया जाएगा नियमावली-2022 में

लखनऊ, 6 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 में विभागों के चिह्नित पदों को नियमावली में शामिल किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों के सेवायोजन के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा खेल गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहन, खेल अवसंरचना के विकास तथा खेलों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि के परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों की भागीदारी और पदक प्राप्ति में निरंतर वृद्धि हुई है। इसी के दृष्टिगत खिलाड़ियों के सेवायोजन के लिए वर्तमान नियमावली में शामिल पदों एवं उनकी संख्या को और पर्याप्त बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की गई। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार संशोधित नियमावली के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों के चिह्नित पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी। ये नियुक्तियां लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर रहेंगी। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप सेवायोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।

योगी कैबिनेट की बैठक में डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी

2 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता के साथ यूपी को ग्रीन व एआई-रेडी डेटा सेंटर हब बनाने की तैयारी

बुंदेलखंड और पूर्वांचल को मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन, 2 लाख करोड़ से अधिक निवेश का लक्ष्य

50 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत 2 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डेटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना
डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डेटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम
मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डेटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली 2 डेटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं।

त्रिस्तरीय पंचायती संस्थाओं के लिए वित्तीय प्रस्ताव स्वीकृत

लखनऊ, 6 जुलाई। कैबिनेट बैठक में पंचायती राज्य संस्थाओं की वित्तीय आवश्यकताओं से संबंधित प्रस्ताव पर भी सहमति दी गई। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत तीनों स्तर की पंचायतों के लिए 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसकी 10 प्रतिशत धनराशि यानी लगभग 1,498 करोड़ रुपये प्रशासनिक, परिचालन एवं रख-रखाव पर खर्च होंगे। इसी राशि में से 495.89 करोड़ रुपये पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय व बैठक भत्तों पर व्यय किए जाएंगे। 

गौरतलब है कि तीनों स्तरों की पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का 01.05 प्रतिशत निदेशालय स्तर पर रोककर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग कार्मिकों के मानदेय, तकनीकी/प्रशासनिक/सिविल व अन्य आवश्यकताओं हेतु व्यय किए जाने के निर्देश हैं। इसे देखते लगभग 157.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग के अंतर्गत गठित वित्त प्रकोष्ठ में राज्य, मंडल, जनपद और विकास खंड स्तर पर कार्यरत कार्मिकों के मानदेय एवं तकनीकी, प्रशासनिक और अन्य आवश्यकताओं पर खर्च होने का अनुमान है। यह राज्य वित्त आयोग की वर्तमान किस्त (14,988.50 करोड़ रुपये) का लगभग 1.05 प्रतिशत है और शासनादेश 12 दिसंबर 2024 के अनुरूप ही है। यह धनराशि निदेशक, पंचायती राज के निर्देश पर नियमानुसार व आवश्यकतानुसार खर्च की जाएगी।

रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, 22 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत खुलेगा नया महाविद्यालय

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और उद्यानिकी को मिलेगा नया विस्तार

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि एवं उद्यान शिक्षा के विस्तार को नई गति मिलेगी।

उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा ग्राम पड़ेरा, परगना एवं तहसील सदर स्थित उपलब्ध भूमि चिन्हित की गई थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपलब्ध 44.888 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इससे रायबरेली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्यानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ तथा निजी क्षेत्र का सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिक एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में उद्यान विभाग संचालित हैं, जहां उद्यान विषयक अध्ययन-अध्यापन का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। महाविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में औद्यानिक शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, 22 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत खुलेगा नया महाविद्यालय

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और उद्यानिकी को मिलेगा नया विस्तार

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि एवं उद्यान शिक्षा के विस्तार को नई गति मिलेगी।

उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा ग्राम पड़ेरा, परगना एवं तहसील सदर स्थित उपलब्ध भूमि चिन्हित की गई थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपलब्ध 44.888 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इससे रायबरेली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्यानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ तथा निजी क्षेत्र का सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिक एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में उद्यान विभाग संचालित हैं, जहां उद्यान विषयक अध्ययन-अध्यापन का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। महाविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में औद्यानिक शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: गोरखपुर और मुरादाबाद में बनेंगे 100-100 बेड के आधुनिक ईएसआई अस्पताल

वाराणसी में स्थापित होगा ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, श्रमिकों व उनके परिजनों को मिलेगा बेहतर इलाज
 
वाराणसी ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में 50 फीसदी एमबीबीएस सीटों पर श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगा प्रवेश

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पतालों तथा वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन को स्वीकृति प्रदान की। योगी सरकार की ओर से इन परियोजनाओं के लिए भारत सरकार को निःशुल्क और रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। 

बीमांकित श्रमिकों व परिजनों को मिलेगी चिकित्सा सुविधा
मुरादाबाद में अस्पताल निर्माण के लिए ग्राम हरथला, तहसील एवं जनपद मुरादाबाद स्थित गाटा संख्या-1336/9.984 हेक्टेयर में से 2.025 हेक्टेयर राज्य सरकार की भूमि ईएसआईसी, श्रम एवं रोजगार विभाग, भारत सरकार को निःशुल्क आवंटित की जाएगी। यह भूमि राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-1 राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज है। मुरादाबाद में प्रस्तावित 100 शैय्या अस्पताल से लगभग 93,591 बीमांकित श्रमिकों और उनके 3,55,646 परिजनों को चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल का निर्माण कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा कराया जाएगा, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। इसके संचालन से चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

इसी प्रकार गोरखपुर में गीडा सेक्टर-09 स्थित संस्थागत भूखंड संख्या एएल-7, क्षेत्रफल 21,427 वर्ग मीटर (करीब 5.249 एकड़) भूमि पर 100 बेड का ईएसआईसी अस्पताल बनाया जाएगा। परियोजना को प्रोत्साहन देने के लिए भूमि की दर 8720 रुपये प्रति वर्ग मीटर के स्थान पर रियायती 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। नियमानुसार अन्य शुल्क अलग से देय होंगे। इस अस्पताल की स्थापना से चिकित्सकीय सुविधाओं के विस्तार के साथ ही प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से नए रोजगार अवसर भी सृजित होंगे। 

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि वाराणसी में बनने वाले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के लिए पिंडरा तहसील के ग्राम पिंडरा में लगभग 13 एकड़ भूमि शिक्षण संकाय के लिए भारत सरकार को निशुल्क दी जाएगी। प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की स्थापना में लगभग 800 करोड़ रुपये का व्यय होने का अनुमान है, जिससे बड़े पैमाने पर चिकित्सकों, पैरामेडिकल तथा संविदा स्टाफ के लिए रोजगार अवसर सृजित होंगे। कॉलेज में एमबीबीएस की अधिसंख्य सीटें उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों को उपलब्ध होंगी। 50 प्रतिशत एमबीबीएस सीटें बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा 18 प्रतिशत सीटों पर राज्य सरकार व 7 प्रतिशत सीटों पर केंद्र सरकार के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा।

अनिल राजभर ने बताया कि प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज में भविष्य में नर्सिंग व पैरामेडिकल कोर्सेज भी प्रारंभ किए जा सकेंगे। राज्य सरकार का यह कदम प्रदेश में श्रमिकों व उनके आश्रितों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे वाराणसी एवं आसपास के जनपदों के संगठित क्षेत्र के 1.45 लाख ईएसआई कार्डधारक श्रमिकों तथा उनके 5.50 लाख परिजनों को बेहतर चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा मिलेगी।

कैबिनेट की मंजूरी: गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़ और मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ का जारी करेंगे म्युनिसिपल बॉण्ड

शहरी विकास परियोजनाओं के लिए जुटेगा बाजार से वित्त, क्रेडिट रेटिंग सुदृढ़ करने के लिए मिलेगी सहायता

अमृत 2.0 के अंतर्गत नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।

वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। शहरी अवसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता को देखते हुए नगर निकायों में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, मार्केट ओरिएंटेशन तथा क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारत सरकार भी अपनी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले निकायों को प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है।

वित्तमंत्री ने बताया कि म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से बाजार से धन जुटाने पर भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपये तथा 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किए जाने का प्रावधान है। म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन करेंगे।

उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के अंतर्गत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और इसे राज्य स्तरीय सुधारों में भी शामिल किया गया है। इसी क्रम में नगर निगम गोरखपुर द्वारा 80 करोड़ रुपये तथा नगर निगम मुरादाबाद द्वारा 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने के प्रस्ताव हैं। दोनों नगर निगमों ने नगर निगम सदन से अनुमोदन प्राप्त करते हुए संबंधित परियोजनाओं का चयन भी कर लिया है। इससे इन दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी तथा नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और सुदृढ़ होगी।

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 में प्रोत्साहन की बौछार 

यूपी बनेगा देश का स्टार्टअप हब, कैबिनेट से मंजूर नई नीति में एआई और डीप-टेक स्टार्टअप्स पर विशेष फोकस

सीड फंडिंग 15 लाख और विशेष परिस्थितियों में इसे 50 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकेगा

100 करोड़ तक पेशेंस कैपिटल का प्रावधान, पूर्वांचल-बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए विशेष अनुदान

एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मिलेगी नई रफ्तार, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के असीमित अवसर

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के तहत बनेगा मिशन

हाईटेक रिसर्च व इनोवेशन के लिए योगी सरकार स्थापित करेगी 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के साथ उत्तर प्रदेश प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दे दी गई। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर का मजबूत, समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यह नीति प्रदेश को नवाचार और उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाने के साथ-साथ वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार (स्केल-अप) तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके तहत सस्टेनेंस अलाउंस (भरण-पोषण भत्ता) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। वहीं प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।

स्टार्टअप्स को मिलेंगे कई नए वित्तीय प्रोत्साहन
नई नीति में स्टार्टअप्स को मजबूत बनाने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 2 करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति, 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, 2 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ईपीएफ और ईएसआई की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्टार्टअप्स की शुरुआती वित्तीय चुनौतियां कम होंगी और उन्हें तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा विशेष पैकेज
सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल सहायता तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इन्क्यूबेटर्स को मिलेगा अधिक सहयोग
नई नीति में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इन्क्यूबेटर्स को भी अधिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इन्क्यूबेटर्स के लिए पूंजीगत अनुदान 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए यह राशि बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके अलावा परिचालन व्यय अनुदान 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष किया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डीप-टेक यू-हब की स्थापना
प्रदेश में अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए जाएंगे। इनका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक, रोबोटिक्स सहित अन्य उभरती तकनीकों पर रहेगा। साथ ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है। सरकार राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब की स्थापना करेगी, जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, निवेश, उद्योग सहयोग, मेंटरशिप तथा अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का एकीकृत मंच उपलब्ध कराएगा।

स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा व्यापक विस्तार
नई नीति के तहत प्रदेश में बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, ग्रैंड चैलेंज, स्टार्टअप वीक, नवाचार संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा मिल सके। सरकार का उद्देश्य स्टार्टअप संस्कृति को गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाकर अधिक से अधिक युवाओं को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ना है।

मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश स्टार्टअप में बहुत आगे है। 17 हजार स्टार्टअप यूपी में रजिस्टर्ड हैं। इनको आगे बढ़ाने और इन्क्यूबेटर्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना की जाएगी। इससे स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा।

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी
लखनऊ। कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित होने वाला यह मिशन आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में स्टार्टअप और नवाचार गतिविधियों की नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगा। मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देना, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा इन्क्यूबेटर, नवाचार केंद्र, डीप-टेक इकोसिस्टम, मेंटरशिप और एक्सेलेरेशन कार्यक्रमों को मजबूत करना है। मिशन के तहत निवेशकों, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी संचालन, निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

सीएम योगी ने निभाया वादा, होमगार्ड जवानों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा स्वीकृत

होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को मिलेगा लाभ, साचीज के माध्यम से मिलेगी स्वास्थ्य सुरक्षा

35.50 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय से लागू होगी होमगार्ड कैशलेस चिकित्सा योजना, राजकीय और संबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज

पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी, 20 करोड़ रुपये होंगे खर्च

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग के अंतर्गत कार्यरत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह सुविधा स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पुलिस समेत कई विभागों के कर्चमारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी पर भी मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने 6 दिसंबर 2025 को होमगार्ड दिवस के अवसर पर होमगार्ड जवानों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ इस घोषणा को अमली जामा पहनाया जाएगा।

राजकीय और निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि योजना के तहत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध राजकीय अस्पतालों और संबद्ध निजी अस्पतालों में आईपीडी (अंतर्रोगी विभाग) उपचार के लिए प्रति परिवार प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इससे गंभीर बीमारी की स्थिति में परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।

सरकार वहन करेगी योजना का खर्च
कैबिनेट से मंजूर योजना के तहत प्रति होमगार्ड स्वयंसेवक एवं अवैतनिक अधिकारी 3 हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना संचालित की जाएगी। इसके लिए सरकार पर लगभग 35.50 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय व्यय अनुमानित है। इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का संचालन साचीज के माध्यम से किया जाएगा। इस योजना से प्रदेश में लगभग 69 हजार होमगार्ड्स और उनके आश्रित लाभान्वित होंगे।

पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी
कैबिनेट बैठक में वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने इन संस्तुतियों को यथावत स्वीकार करने का निर्णय लिया। इसके तहत गृह (पुलिस) विभाग के कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में संशोधन किया जाएगा। साथ ही न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा आयुष विभाग के कर्मचारियों के वर्दी, वर्दी नवीनीकरण और वर्दी धुलाई भत्ते में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। हालांकि अन्य भत्तों और मामलों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है।

20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार
सरकार के अनुसार इस निर्णय से विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उन्हें बढ़ी हुई दरों पर वर्दी संबंधी भत्ते प्राप्त होंगे। इन संस्तुतियों को लागू करने से राज्य सरकार पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा।

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