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बिहार के औरंगाबाद में खुलेगा कृषि महाविद्यालय, हसपुरा के डिंडीर में 5 एकड़ जमीन चिह्नित

औरंगाबाद
जिले में कृषि महाविद्यालय (Agriculture Collge) के स्थापना की स्वीकृति मिलने के बाद इस दिशा में पहल तेज हो गई है।

महाविद्यालय के निर्माण के लिए जमीन की तलाश पूर्ण हो गई है। हसपुरा प्रखंड के डिंडीर में पांच एकड़ जमीन चिह्नित की गई है।

पूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। वर्तमान में चिह्नित जमीन के सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।

हसपुरा प्रखंड के डिंडिर में बनने की संभावना
कृषि महाविद्यालय की स्थापना होने से जिले में कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्र-छात्राओं को कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।

करीब पांच माह पहले उच्च विभागीय अधिकारियों के द्वारा जमीन का निरीक्षण किया गया था। इसी जमीन को चयन होने की बात कही गई थी।

परंतु यह अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। एक सप्ताह के अंतिम अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कर जमीन सत्यापन का कार्य कर लिया जाएगा।

जमीन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाविद्यालय की स्थापना से संबंधित आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

कृषि शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
कृषि महाविद्यालय की स्थापना से जिले के विद्यार्थियों को कृषि के क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे। वर्तमान में कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को दूसरे जिलों या अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है।

जिले में ही कृषि महाविद्यालय खुलने से विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिल सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

किसानों को भी होगा फायदा
कृषि महाविद्यालय की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले के किसानों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र में शोध और नई तकनीकों के विकास के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

इसके माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत बीज, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के नए तरीकों की जानकारी देने की संभावनाएं विकसित होंगी। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल खेती की तकनीकों पर अनुसंधान से भी किसानों को लाभ मिल सकता है।

औरंगाबाद कृषि प्रधान जिला है। ऐसे में यहां कृषि महाविद्यालय की स्थापना को कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब जमीन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने और स्थापना से संबंधित आगे की कार्रवाई शुरू होने का इंतजार है। जमीन चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जमीन सत्यापन का कार्य होते ही आगे का कार्य शुरु हो जाएगा।
    रितेश यादव, वरीय उपसमाहर्ता औरंगाबाद

 

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