राजनीती

महारैली में 22 विपक्षी दल बोले- मोदी हटाओ, लेकिन नहीं बताया मोदी का विकल्प कौन?

 
नई दिल्ली   
 
मेगा रैली के जरिये विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट होने की हुंकार तो भर दी, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल का जवाब नहीं मिला. सवाल ये था कि अगर मोदी नहीं तो कौन? यानी अगर विपक्षी एकता मोदी सरकार को हटाने में कामयाब हो भी गई तो देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? हालांकि, अपने भाषण में सभी पार्टियों के नेताओं ने कहा कि इसका फैसला चुनाव बाद किया जाएगा, अभी तो सिर्फ बीजेपी को हटाना है.

विपक्षी एकता पर सवाल उठाते हुए बीजेपी हमेशा से ही ये सवाल उठाती आई है, लेकिन शनिवार को मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता के सबसे बड़े मेले में लगे विपक्ष के जमघट में सबने ये तो कहा कि अब मोदी सरकार जाने वाली है, लेकिन ये नहीं बताया कि मोदी जाएंगे तो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विपक्षी किसे बिठाएंगे. रैली के दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे पास बहुत नेता हैं. हम चुनाव बाद तय करेंगे कि किसे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाएंगे, लेकिन यह हम जरूर बता दें कि मोदी सरकार से अच्छी सरकार हम चलाएंगे.
 
विपक्ष का उम्मीदवार होगा कौन?
खैर देश की 22 विपक्षी पार्टियों के 44 नेताओं से सजे मंच से देश को इस सवाल का जवाब नहीं मिला कि अगर देश में फेडरल फ्रंट की सरकार बन गई तो देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि बीजेपी के लोग कहते हैं कि हम पीएम पद के लिए लड़ेंगे, लेकिन हम यहां पद की लड़ाई के लिए नहीं बल्कि मोदी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए साथ आए हैं. हाल ही में मायावती के साथ यूपी में एंटी बीजेपी गठबंधन की नींव रखने वाले अखिलेश यादव ने कहा कि जनता जिसे चाहेगी, वहीं पीएम बनेगा. अब सवाल उठता है कि जनता तो तब चाहेगी, जब उसके पास मोदी के खिलाफ विपक्ष का कोई उम्मीदवार होगा.

बीजेपी ने कहा- पहले उम्मीदवार तय कर लें, फिर लड़ाई लड़ें

बीजेपी नेता और यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा का कहना है कि विपक्ष मोदी को हटाना चाहता है, लेकिन सवाल यह है कि इन 20-25 नेताओं में से प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन है. पहले यह आपड़ में लड़कर फैसला कर लें कि उम्मीदवार कौन होगा. इसके बाद मोदी और बीजेपी से लड़ाई लड़े.
 
मायावती और राहुल का रैली से किनारा
मोदी सरकार के खिलाफ इस विपक्षी रैली के मंच पर आसीन दिग्गजों के बीच पीएम पद के कई उम्मीदवार मौजूद थे. लेकिन यूपी में खुद को देश की भावी प्रधानमंत्री बताने वाले पोस्टर लगवा चुकीं मायावती ने अपनी दावेदारी जताने के लिए विपक्षी एकता के सबसे बड़े मंच को नहीं चुना और इसी तरह कांग्रेस की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार राहुल गांधी ने भी किनारा कर लिया.

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