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बिहार के आर्केस्ट्रा में नेपाली नर्तक, तस्करी कर लड़की को बनाया कुंआरी गर्भवती

मोतिहारी.

बॉर्डर इलाके के पलनवा थाना क्षेत्र के सौनाहा बाजार के एक अवैध आर्केस्ट्रा से रेस्क्यू की गई नर्तक ने नेपाल से जो खुलासा किया है, वह इन आर्केस्ट्रा के बाहरी चकाचौंध के साए में काले धंधे को उजागर करता है। नर्तक को पलनवा पुलिस ने अवैध आर्केस्ट्रा से बरामद किया। इसको दो माह तक बालिका सुधार गृह में रखने के बाद माइती नेपाल को सौंपा गया। माइती नेपाल एक सामाजिक संस्था है, जहां पर इस प्रकार की लड़कियों को रेस्क्यू करने का कार्य किया जाता है। यहां नर्तक ने जो कुछ बताया उसको सुनकर लोगों के दिल दहल जाएंगे।

इसके केंद्रीय कार्यालय काठमांडू में पीड़िता ने जो कुछ अपना दर्द बताया, वह आर्केस्ट्रा की काली कहानी को बताता है। उसने अपनी प्रारंभिक जिंदगी से लेकर आर्केस्ट्रा के दलदल से मुक्त होने के बीच की कहानी का उसने खुलासा किया है। इस दौरान उसने बताया कि 15 वर्ष की उम्र में ही वह पलनवा थाना क्षेत्र के सौनाहा बाजार स्थित उक्त आर्केस्ट्रा में आईं थी। यहां से मुक्त होने तक वह 5 माह की कुंवारी गर्भवती हो चुकी थी। वह काठमांडू के सिंधुली में एक रेस्टोरेंट में अपनी बहन के साथ बैरा का काम करती थी। बाद में वह झापा गाउपालिका के वार्ड 7 स्थित अपने घर आ गई। यहां उरला बारी में मामा का भी घर था। वहां आना जाना लगा रहता था। वही उसकी मुलाकात सीता (बदला हुआ नाम) की एक लड़की से हुई। सीता का संपर्क आर्केस्ट्रा में लड़कियों को भेजने वाले तस्कर से था। इसको तीन हजार प्रति रात्रि डांस के मेहनताना का झांसा देकर बॉर्डर क्रॉस कराया गया।

अपने घर से बिना बताए वह बीरगंज एक और लड़की के साथ आईं, जहां से इनको मोटर साइकिल से रक्सौल व सौनाहा ले जाया गया। यहां पुलिस की रेड पड़ने तक कई वर्षों तक डांस करती रही। साथ ही अन्य कई प्रकार के अनैतिक कार्य भी करती रही। आर्केस्ट्रा में मारपीट को इसने आम बात बताया और यह भी बताया कि एक बार इनके चंगुल में फंस जाने के बाद निकलना मुश्किल होता है। वैसे नेपाली राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की है। इसके अनुसार नेपाल से भारत की तरफ महिला तथा किशोरियों के अवैध गमना गमन व तस्करी में वृद्धि हुई है। पहाड़ी इलाकों की महिलाओं और किशोरियों के साथ यह समस्या ज्यादा है।

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