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हरियाणा बनेगा पहला वाटर सिक्योर राज्य, 5700 करोड़ रुपये से बदलेगा सिंचाई तंत्र

चंडीगढ़.

मुख्यमंत्री नायब सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विश्व बैंक द्वारा लगभग 3 दशकों के उपरांत हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'जल संरक्षित हरियाणा परियोजना के अंतर्गत 5700 करोड़ के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग (ऋण) को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री सैनी चंडीगढ़ में जल संरक्षित हरियाणा कार्यक्रम को लेकर आयोजित अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि 6 वर्षों दौरान वर्ष 2026 से 2032 की अवधि में चरणबद्ध रूप से वितरित की जाएगी। इस राशि का उपयोग नहरी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर किए जाने वाले कार्यों के लिए किया जाएगा। राज्य में कुल 1570 नहरों में से 892 नहरों का पिछले 20 वर्षों में पुनर्वास किया जा चुका है तथा अगले 5 वर्षों में शेष 678 नहरों का पुनर्वास किया जाना प्रस्तावित है। इसमें विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग 2325 करोड़ की लागत से 115 नहरें, राज्य बजट से 2230 करोड़ की लागत से 284 नहरें तथा नाबार्ड द्वारा 2880 करोड़ की लागत से 279 नहरों का पुनर्वास किया जाना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मिकाडा द्वारा कुल 15,562 नहरी खालों में से 4,487 खालों का पिछले 20 वर्षों में पुनर्वास किया जा चुका है तथा शेष 1961 खालों का पुनर्वास आगामी 5 वर्षों में किया जाना प्रस्तावित है। इसमें विश्व बैंक के सहयोग 450 करोड़ की लागत से 400 नहरी खालें, राज्य बजट से 1250 करोड़ की लागत से 1500 खालें तथा नाबार्ड के माध्यम से 402 करोड़ की लागत से 61 खालों का पुनर्वास किया जाना शामिल है। इस अतिरिक्त विश्व बैंक द्वारा 900 करोड़ के सहयोग से लगभग 70,000 एकड़ कृषि भूमि में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का कार्यान्वयन किया जाएगा।

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