
पटना.
सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा जेब भरने वाले दलालों की अब खैर नहीं है। यही नहीं उनका साथ देने वाले डॉक्टरों व अन्य चिकित्साकर्मियों की संलिप्तता साबित होने पर उनके खिलाफ और कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने इस बाबत मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल, जिला-अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व स्वास्थ्य उपकेंद्रों के औचक निरीक्षण के लिए धावा दल गठित करने को कहा है।
राज्यस्तर पर नोडल पदाधिकारी बनाया गया
इस छापामार दल में वरीय उप समाहर्ता, जिलास्तरीय अन्य अधिकारी व सरकारी अस्पताल के डॉक्टर रहेंगे जो अस्पताल-अस्पताल जाकर जांच करेंगे। हर दिन की कार्रवाई की समीक्षा के लिए राज्यस्तर पर अपर सचिव धनंजय कुमार को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
वहीं जिला स्तर पर भी नोडल पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे जो जिले में की गई हर दिन की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग को भेजेंगे। स्वास्थ्य सचिव ने डीजीपी को भी पत्र भेज सभी जिलों के एसपी-एसएसपी को अस्पतालों की जांच कराने का अनुरोध किया है।
सख्त कानूनी कार्रवाई तय
पत्र में स्वास्थ्य सचिव ने लिखा है कि लगातार इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को जानबूझकर गुमराह कर महंगे निजी अस्पतालों, जांच घरों और दवा दुकानों की ओर मोड़ा जा रहा है। इसके लिए परिसर में निजी नर्सिंग होम, निजी जांच केंद्र-रेडियो डायग्नोसिस व दवा दुकानदारों के कर्मचारियों का जमावड़ा रहता है। इलाज के लिए आए मजबूर मरीजों को गुमराह कर सरकारी सुविधाओं से वंचित व महंगे निजी इलाज में झोंका जा रहा है। ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ आमजन को सरकारी चिकित्सा सुविधा से वंचित व जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा पहुंचाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जानी अपेक्षित है। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में सक्रिय दलालों, निजी नर्सिंग होम एजेंटों व जांच माफिया के खिलाफ सख्त व सघन कार्रवाई की जरूरत है।
मिलीभगत पर सरकारी कर्मी भी नहीं बचेंगे
पत्र में सबसे बड़ा संदेश यह है कि अगर किसी सरकारी डॉक्टर या कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। उस पर भी कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई होगी। हर दिन की कार्रवाई की प्रगति सीधे स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाएगी।




