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सिंगापुर में भारतीय समुदाय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संवाद

 

नौ वर्षों में तीन गुना हुई अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था और औद्योगिक विस्तार हुआ मजबूत

मुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीयों को दिया निवेश, पर्यटन और साझेदारी का खुला निमंत्रण

सिंगापुर,

सिंगापुर में बसे भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नए भारत और नए उत्तर प्रदेश की स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरी तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जो उत्तर प्रदेश कभी दंगों और कर्फ्यू के लिए जाना जाता था, वही आज विकास, निवेश, आस्था, औद्योगिक प्रगति और वैश्विक विश्वास का केंद्र बन चुका है। अब वह दंगों वाला यूपी नहीं है। अब उत्तर प्रदेश में न कर्फ्यू है, न दंगा, अब उत्तर प्रदेश में सब चंगा है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नए उत्तर प्रदेश की बदली तस्वीर, विरासत और विकास के संगम तथा कानून-व्यवस्था में आए व्यापक परिवर्तन को विस्तार से रखा। इस दौरान सीएम योगी ने उपस्थित सभी लोगों को आगामी होली पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

विरासत और विकास का अद्भुत संगम बना उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश आज जिस परिवर्तन का साक्षी है, वह बीते नौ वर्षों की प्रतिबद्धता, सुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने स्मरण कराया कि कभी दंगे, असुरक्षा और अराजकता जिसकी पहचान बन गए थे, वही प्रदेश आज कानून-व्यवस्था, निवेश और विकास का मॉडल बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमीनी धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उत्तर प्रदेश ने ‘विरासत और विकास’ का संतुलित और प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक मर्यादा और आत्मगौरव का प्रतीक है। काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास हमारी शाश्वत परंपरा को आधुनिक स्वरूप में स्थापित करता है, जबकि मथुरा-वृंदावन की पावन भूमि भारत की भक्ति और अध्यात्म की जीवंत अभिव्यक्ति है। समरसता का साक्षात दृश्य महाकुंभ में देखने को मिलता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु संगम में एक साथ आस्था की डुबकी लगाते हैं, न कोई बड़ा, न छोटा। सब एक स्वर में ‘हर-हर गंगे’ का उद्घोष करते हैं। यही भारत की आत्मा है और यही उसकी शक्ति।

9 वर्ष में तीन गुना हुई यूपी की अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच और रणनीतिक क्रियान्वयन का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था बीते नौ वर्षों में तीन गुना हुई है तथा प्रति व्यक्ति आय में भी लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में 34 से अधिक सेक्टोरल नीतियां लागू हैं। 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। क्लस्टर आधारित औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं। निर्बाध विद्युत आपूर्ति और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही हैं। आज भारत में बनने वाले मोबाइल फोन का लगभग 55 प्रतिशत तथा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का करीब 60 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। अब प्रदेश का प्रत्येक नागरिक शांतिपूर्वक विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने निवेश, पर्यटन और औद्योगिक साझेदारी के लिए सभी को उत्तर प्रदेश आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि आने वाला समय प्रदेश के लिए और अधिक संभावनाओं से भरा है।

भारतीय अपनी पहचान और मूल्यों से जुड़े रहते हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के किसी भी कोने में रह रहा भारतीय समुदाय अपनी मातृभूमि के प्रति जो अटूट लगाव और आत्मीयता रखता है, वह हम सभी को भारत के विकास में योगदान देने के लिए नई प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों के उत्साह और समर्पण के लिए अभिनंदन करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें इतनी गहरी हैं कि हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी भारतीय अपनी पहचान और मूल्यों से जुड़े रहते हैं। वर्षों पूर्व एक ऋषि ने कहा था, “दुर्लभं भारते जन्म, मानुषं तत्र दुर्लभम्” अर्थात भारत की पवित्र भूमि पर जन्म लेना ही दुर्लभ है और उसमें भी मनुष्य के रूप में जन्म लेना अत्यंत सौभाग्य की बात है। यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय होना चाहिए कि उसके पूर्वजों की जड़ें भारत से जुड़ी हैं और वही जड़ें आज भी उसे मातृभूमि के प्रति आकर्षित करती हैं।

ग्लोबल विलेज की अवधारणा भारत ने सदियों पहले “वसुधैव कुटुम्बकम्” के रूप में दी
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता और मातृभूमि का ऋण जीवनभर बना रहता है। भारतीय संस्कृति हमें यह सिखाती है कि जिस धरती पर हम रहें, उसके प्रति पूर्ण कृतज्ञता और दायित्वबोध के साथ कार्य करें। यही भारतीय संस्कार हैं। उन्होंने सनातन परंपरा के सार्वभौमिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने सदियों पहले “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश दिया। यह धरती एक परिवार है। आज ‘ग्लोबल विलेज’ की जो अवधारणा दुनिया में प्रचलित है, उसका मूल भाव भारत ने हजारों वर्ष पहले स्थापित कर दिया था। एक परिवार की तरह विविधता में एकता, भिन्नताओं के बावजूद समान सम्मान और सामूहिक प्रगति, यही भारत की पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” इसी भारतीय चिंतन की आधुनिक अभिव्यक्ति है। विकास तभी संभव है जब सामूहिकता और कृतज्ञता का भाव साथ हो। प्रत्येक नागरिक का योगदान महत्वपूर्ण है और उसी सहभागिता से नया भारत आगे बढ़ रहा है।

जल्द ही भारत बनेगा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर अपनी शक्ति और क्षमता का परिचय दे रहा है। शीघ्र ही भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होगा। यह केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प है। डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार के क्षेत्र में भारत ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे अभूतपूर्व हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लेकर भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को स्वीकार किया। विश्व के विकसित देशों ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा 140 करोड़ देशवासियों और वैश्विक समुदाय के हित में उठाए जा रहे कदमों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त और एसीएस फाइनेंस दीपक कुमार, सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक एन अंबुले और ग्लोबल इंडियन स्कूल के संस्थापक अतुल समेत अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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