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पंजाब में आज से गेहूं खरीद शुरू, बाहरी अनाज पर कड़ी निगरानी

चंडीगढ़.

गेहूं खरीद का सीजन पहली अप्रैल से शुरू हो रहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग इस बार अन्य राज्यों से आने वाले गेहूं को रोकने के लिए सीमा पर नजर रखेगा। विभाग के मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों को राज्य की मंडियों में बाहरी राज्यों से गेहूं की बिक्री पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग गेहूं खरीद के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं।

उम्मीद है कि इस बार मंडियों में 122 लाख टन गेहूं आ सकता है। इसके लिए विभाग ने 1987 खरीद केंद्रों को अधिसूचित किया है। बता दें कि आरबीआई ने अप्रैल माह के लिए 20,973 करोड़ की सीसीएल जारी की है। दूसरे राज्यों से अनाज लाकर पंजाब में एमएसपी पर बेचने के मामले में विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर गेहूं के सीजन में ऐसा कम देखने को मिलता है। मुख्य समस्या धान के सीजन में आती है।

पंजाब सरकार ने इस बार मंडियों में दूसरे राज्यों से आने वाले गेहूं पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि बाहरी गेहूं की खरीद किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों को सख्ती से निगरानी करने को कहा गया है। मंत्री ने बताया कि राज्य में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी और सभी मंडियों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अधिकारियों को मंडियों में साफ-सफाई, बिजली और पेयजल जैसी मूल सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार ने इस सीजन के लिए 122 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है जबकि विभाग ने 132 एलएमटी तक खरीद के लिए इंतजाम किए हैं। इसके लिए 1897 खरीद केंद्र अधिसूचित किए गए हैं और 266 अतिरिक्त अस्थायी यार्डों के प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं। केंद्र सरकार से अप्रैल माह के लिए 30,973 करोड़ रुपये की नकद ऋण सीमा भी मिल चुकी है।

भंडारण व्यवस्था पर जोर
मंत्री ने बताया कि भंडारण को लेकर केंद्र से लगातार बातचीत की जा रही है ताकि नई फसल के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपायुक्तों के साथ तालमेल बनाए रखें और मंडियों में तिरपाल व अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

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