प्रदेश

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी घोटाले में बड़ा मोड़, पूर्व CFO नलिनी बनेगी सरकारी गवाह

चंडीगढ़ 

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड में हुए 116.84 करोड़ रुपए के घोटाले में गिरफ्तार पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नलिनी मलिक अब सरकारी गवाह बनने की तैयारी में है। बुड़ैल जेल में बंद नलिनी ने वार्डर के जरिए सीबीआई कोर्ट को अर्जी भेजकर जांच में शामिल होने गुहार लगाई। 

अर्जी में नलिनी ने कहा है कि यदि उसे सरकारी गवाह बनाया जाता है तो वह स्मार्ट सिटी घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, वह नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े कई बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी जानकारी देने को तैयार है।

सीबीआई कोर्ट ने इस अर्जी पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सीबीआई नलिनी मलिक को सरकारी गवाह बनाने पर सहमत होती है या नहीं।

मेडिकल ग्राउंड पर लगाई जमानत अर्जी
करीब दो महीने पहले सामने आए इस घोटाले में नलिनी मलिक की भूमिका जांच में सामने आने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसे 2 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में बंद है। इस बीच नलिनी ने मेडिकल ग्राउंड पर जमानत अर्जी भी दायर की है, जिस पर 26 मई को सुनवाई होनी है। मामले में कई बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

हालांकि शुरुआती जांच में नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी। अब केस सीबीआई के पास पहुंचने के बाद कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

गृह मंत्रालय के आदेश पर CBI को सौंपा केस
चंडीगढ़ पुलिस ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड में 116.84 करोड़ रुपए और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) में करीब 83 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का खुलासा किया था।

जांच में सामने आया कि स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट की बड़ी रकम IDFC फर्स्ट बैंक में एफडी के रूप में जमा थी। आरोप है कि बैंक अधिकारियों और सरकारी अफसरों की मिलीभगत से इस रकम को शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश किया गया। बदले में बैंक अधिकारियों ने मोटी रिश्वत दी।

चंडीगढ़ पुलिस ने दोनों मामलों में अलग-अलग FIR दर्ज की थीं, लेकिन बाद में गृह मंत्रालय के आदेश पर केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। अब पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

11 फर्जी एफडी बनाकर घुमाने पैसे
जांच के अनुसार, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद बैंक खाते में जमा रकम नगर निगम के खाते में ट्रांसफर होनी थी। लेकिन आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने रकम निकालकर शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश कर दिया।

जहां नगर निगम के खाते में करोड़ों रुपए आने थे, वहां केवल 81.20 रुपए ही ट्रांसफर हुए। बाकी रकम कथित तौर पर आरोपियों ने आपस में बांट ली।

सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि नलिनी मलिक समेत अन्य अधिकारियों और बैंक कर्मियों ने मिलकर 11 फर्जी एफडी तैयार की थीं, ताकि किसी को गड़बड़ी का शक न हो। बाद में इन्हीं एफडी के जरिए रकम को अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button