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हिसार का 63 करोड़ का डबल लूप इंटरचेंज प्रोजेक्ट अटका, हाईकोर्ट ने पेड़ कटाई पर लगाई रोक

हिसार.

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस एक बार फिर हिसार की धरती पर आकार लेती दिखाई दे रही है। गांव ढंढूर के समीप एनएच-9 और एनएच-52 को आधुनिक डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास के माध्यम से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल कागजों में ही ठहर गई है।

उच्च न्यायालय के एक केस में दिए आदेश के बाद प्रदेशभर में पेड़ों की कटाई पर लगी रोक ने इस परियोजना की रफ्तार पर अचानक विराम लगा दिया है। जिस परियोजना से हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब हरियाली और विकास के द्वंद्व में उलझी खड़ी है। टेंडर आवंटित हो चुका है, तकनीकी तैयारियां भी लगभग पूरी हैं, लेकिन निर्माण स्थल पर खड़े पेड़ फिलहाल इस परियोजना के सबसे बड़े अवरोध बन गए हैं।

आदेश ने थाम दी परियोजना की चाल
प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक का आधार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे सुनील कुमार शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले को माना जा रहा है। हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सात अप्रैल 2026 को क्षेत्रीय वन अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आगामी आदेश तक किसी भी आयु अथवा प्रजाति के पेड़ की कटाई की अनुमति न दी जाए। इसके बाद से विभागीय स्तर पर पेड़ों की कटाई से जुड़े प्रस्ताव भी रोक दिए गए। इसी आदेश की परछाई अब हिसार की इस बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना पर भी पड़ रही है।

एनएचएआई करवा रहा है पेड़ों का सर्वे
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अब निर्माण क्षेत्र में पेड़ों की गणना और सर्वे का कार्य करवा रहा है। विभाग यह स्पष्ट करने में जुटा है कि परियोजना के लिए आखिर कितने पेड़ों की कटाई आवश्यक होगी। हालांकि स्थिति साफ है कि जब तक पेड़ हटाने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक निर्माण कार्य की शुरुआत संभव नहीं दिखाई देती। ऐसे में जिस परियोजना से क्षेत्र को शीघ्र राहत मिलने की उम्मीद थी, उसका इंतजार अब और लंबा हो सकता है।

ढंढूर के पास आकार लेगा आधुनिक यातायात केंद्र
प्रस्तावित योजना के तहत गांव ढंढूर के समीप एनएच-9 और एनएच-52 को जोड़ने के लिए दो आधुनिक डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास बनाए जाने हैं। ये अंडरपास मौजूदा ओवरब्रिज से लगभग एक-एक किलोमीटर की दूरी पर विकसित किए जाएंगे। इनके निर्माण के बाद वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग एक ही बिंदु पर व्यवस्थित रूप से जुड़ सकेंगे। इससे यातायात अधिक सुगम और सुरक्षित बनने की उम्मीद है।

भारी वाहनों के लिए भी होगा सहज मार्ग
इंजीनियरों के अनुसार प्रत्येक अंडरपास की चौड़ाई लगभग 20 मीटर और ऊंचाई साढ़े पांच मीटर के आसपास होगी। आधुनिक मानकों पर आधारित यह संरचना भारी ट्रकों और बड़े वाहनों की आवाजाही को भी बिना बाधा के संभव बनाएगी। भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को ध्यान में रखते हुए परियोजना को तकनीकी रूप से मजबूत स्वरूप दिया गया है।

63.27 करोड़ की परियोजना
करीब 63.27 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना को एनएचएआई ने विस्तृत योजना के साथ तैयार किया है। इसके पूर्ण होने पर प्रतिदिन गुजरने वाले लगभग 30 हजार वाहनों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। वाहनों को बिना रुके मार्ग मिलने से ईंधन की बचत होगी, यात्रा समय घटेगा और यातायात जाम की समस्या में भी कमी आएगी।
एनएच-9 का यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता रहा है। क्रास ट्रैफिक और अव्यवस्थित मोड़ों के कारण यहां हादसों का खतरा बना रहता है। डबल लूप इंटरचेंज बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अलग-अलग स्तरों पर संचालित होगी, जिससे टकराव के बिंदु कम होंगे और दुर्घटनाओं की आशंका में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

इस परियोजना से विकास को मिलेगी रफ्तार
हिसार-सिरसा मार्ग और हिसार-कैथल मार्ग को बेहतर ढंग से जोड़ने वाली यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों के अनुसार इससे औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। बेहतर संपर्क व्यवस्था निवेश आकर्षित करेगी और रोजगार के अवसरों का विस्तार भी संभव होगा। गांव ढंढूर निवासी विकास जांगड़ा और नरेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित यह परियोजना क्षेत्र के लिए एक दूरदर्शी और जनहितकारी पहल है। यह भविष्य की सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था की मजबूत नींव है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद एनएच-9 और एनएच-52 के बीच आवागमन कहीं अधिक सहज और सुरक्षित हो जाएगा।

डबल लूप इंटरचेंज के प्रमुख लाभ
सुचारू यातायात : अलग स्तर पर मार्ग बनने से वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और यातायात निर्बाध रूप से चलता रहेगा।
दुर्घटनाओं में कमी : क्रासिंग और टर्निंग प्वाइंट कम होने से हादसों की आशंका घटेगी।
समय और ईंधन की बचत : बिना रुकावट के सफर से यात्रा तेज होगी और ईंधन की खपत कम होगी।
बढ़ती ट्रैफिक क्षमता : भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को संभालने में यह संरचना अधिक सक्षम होगी।
कम होगा प्रदूषण : वाहनों के लगातार चलने से इंजन कम समय तक आइडल रहेगा, जिससे प्रदूषण घटेगा।
बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी : दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग सीधे जुड़ने से व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

अनिकेत श्रीवास्तव ने कहा कि न्यायालय के एक आदेश के चलते पेड़ों की कटाई पर रोक लगी हुई है। इसी कारण गांव ढंढूर के पास प्रस्तावित डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास परियोजना पर फिलहाल काम शुरू नहीं हो पाया है। विभाग पेड़ों का सर्वे करवा कर रिपोर्ट तैयार करेगा तभी स्थिति स्पष्ट होगी। पेड़ कटाई की अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आरंभ हो पाएगा।

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