Punjab में SIR शुरू, घर बंद मिलने पर दोबारा आएंगे BLO; फॉर्म जमा और वापस लेने की प्रक्रिया तेज

चंडीगढ़/जालंधर.
पंजाब में 25 जून से यानी आज विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) के तहत घर-घर गणना के पहले चरण का काम शुरू है। घर-घर गणना संबंधी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गणना के पहले चरण के दौरान बी.एल.ओ. द्वारा घर-घर जाकर प्री-प्रिंटेड फॉर्मों का वितरण किया जाएगा।
बी.एल.ओज. इन फॉर्मों को भरने में मतदाताओं की मदद करेंगे और इन्हें घर-घर जाकर वापस भी एकत्रित करेंगे। घर-घर गणना की प्रक्रिया 24 जुलाई तक चलेगी। यदि बी.एल.ओज. को कोई फॉर्म प्राप्त न हो तो वह उस घर का 3 बार दौरा करेगा और अपने दौरे संबंधी जानकारी घर के दरवाजे पर स्टिकर चिपकाकर दर्ज करेगा। उन्होंने बताया कि 24,453 बी.एल.ओज. द्वारा राज्य के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं की गणना की जाएगी। वर्तमान में पंजाब में 1 करोड़ 84 लाख 61 हजार 581 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है, जो 86.02 प्रतिशत है।
मुख्य चुनाव अधिकारी पंजाब ने बताया कि भारत चुनाव आयोग द्वारा एस.आई.आर. संबंधी घोषित कार्यक्रम के अनुसार 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर गणना, पोलिंग स्टेशन की रैशनेलाइजेशन का काम 24 जुलाई तक पूरा किया जाएगा, जबकि मतदाता सूचियों का ड्राफ्ट 3 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। मतदाता सूचियों संबंधी आपत्तियां और दावे 3 अगस्त से 2 सितम्बर तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे। आपत्तियों और दावों का निपटारा 3 अगस्त से 28 सितम्बर तक किया जाएगा।
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 1 अक्तूबर को किया जाएगा। मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बताया कि एस.आई.आर. की पूरी प्रक्रिया संबंधी पंजाब राज्य की सभी राजनैतिक पार्टियों को बैठक करके जानकारी दे दी गई है और उनके द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल किया गया है।
SIR अभियान: मतदाताओं के लिए क्या बदलेगा, क्या नहीं
घर-घर वोटर लिस्ट की जांच क्यों हो रही है?
चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को साफ और दुरुस्त करने के लिए SIR अभियान चला रहा है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि सूची में कोई फर्जी नाम, दोहरी एंट्री, मृत व्यक्ति या स्थान बदल चुके मतदाता तो नहीं हैं।
BLO आपके घर आए तो क्या प्रक्रिया होगी?
बूथ लेवल अधिकारी मतदाता की जानकारी की पुष्टि करेगा। जरूरत पड़ने पर फॉर्म भरवाया जाएगा और रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा। यह सामान्य सत्यापन प्रक्रिया है।
घर पर न मिलने से वोट पर असर पड़ेगा?
नहीं। अगर कोई घर पर नहीं मिलता तो अधिकारी दो-तीन बार दोबारा संपर्क करेगा। सिर्फ इस वजह से किसी की वोट नहीं हटाई जाएगी।
शहर से बाहर रहने वालों को चिंता करने की जरूरत नहीं
काम, पढ़ाई या किसी और कारण से बाहर रह रहे लोगों की वोट अपने आप खत्म नहीं होगी। उन्हें जानकारी देने का पूरा मौका मिलेगा।
अगर अधिकारी घर नहीं आया तो क्या करें?
मतदाता खुद पहल कर सकते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन, BLO या चुनाव कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
SIR में कोई फीस नहीं लगती
यह पूरी प्रक्रिया मुफ्त है। अगर कोई व्यक्ति पैसे की मांग करता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है।
पहले से वोटर हैं, फिर भी जांच क्यों?
SIR सिर्फ नए नाम जोड़ने का अभियान नहीं है। पुराने मतदाताओं की जानकारी को भी अपडेट और सत्यापित किया जा रहा है।
वोटर कार्ड या आधार न हो तो?
वोटर कार्ड या आधार कार्ड जरूरी नहीं है। अन्य वैध दस्तावेजों से भी पहचान साबित की जा सकती है।
किरायेदार, छात्र और PG में रहने वालों के अधिकार
किराए पर रहने वाले, छात्र या हॉस्टल/PG में रहने वाले लोग जहां रह रहे हैं, वहां वोट बनवा सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति का नाम एक ही जगह रह सकता है।
विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाता
जो लोग विदेश में पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं और अब भी भारतीय नागरिक हैं, वे वोटर बने रह सकते हैं। विदेशी नागरिकता लेने पर वोट का अधिकार खत्म हो जाता है।
अनमैप्ड वोटर का मतलब क्या है?
कुछ मतदाताओं का नाम सूची में तो है, लेकिन उनका पता या पोलिंग बूथ डिजिटल सिस्टम में सही तरह जुड़ा नहीं है। ऐसे लोगों को अपनी जानकारी ठीक कराने के मौके दिए जाएंगे।
दो जगह वोट होने पर क्या होगा?
कानून के मुताबिक एक व्यक्ति एक ही जगह वोटर हो सकता है। दो जगह नाम होने पर एक जगह की एंट्री हटानी होगी।
पता बदला है तो क्या करना चाहिए?
जिले या राज्य बदलने पर वोट ट्रांसफर कराने की सुविधा मौजूद है। इसके लिए आवेदन किया जा सकता है।
क्या किसी की वोट सीधे हट सकती है?
नहीं। बिना सूचना और जवाब का मौका दिए किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा।
फॉर्म नहीं भरा तो क्या वोट कट जाएगी?
नहीं। केवल फॉर्म न भरने से वोट अपने आप समाप्त नहीं होती।
नए वोटरों के लिए राहत की खबर
जो युवा 1 जुलाई 2026 तक 18 साल के हो जाएंगे, वे आवेदन करके वोटर बन सकते हैं। SIR के बाद दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। सभी प्रक्रियाओं के बाद अंतिम वोटर सूची 1 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी।
निष्कर्ष
SIR अभियान वोट छीनने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि वोटर लिस्ट को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश है। सही जानकारी देने से मतदाता और चुनाव व्यवस्था – दोनों मजबूत होंगे।




