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आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 20 दिन की पैरोल मंजूर

जोधपुर

सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14 (ए) का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान के अलावा गुजरात में भी उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है और गांधीनगर की अदालत उसे दोषी ठहरा चुकी है।

नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम उर्फ आशुमल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद 87 वर्षीय आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर कर दी है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस की ओर से जताई गई इस आशंका को खारिज कर दिया कि पैरोल पर रिहा होने के बाद वह फरार हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस आधार पेश नहीं किया गया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पैरोल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल आशंकाओं के आधार पर किसी कैदी को पैरोल से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आसाराम पैरोल का दुरुपयोग करेगा या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

राज्य सरकार ने पैरोल का किया था विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जोधपुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आसाराम का 20 दिन की पैरोल का आवेदन पहले ही खारिज कर दिया गया था। सरकार का कहना था कि पुलिस ने पैरोल मिलने की स्थिति में उसके फरार होने की आशंका जताई थी।

सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14 (ए) का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान के अलावा गुजरात में भी उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है और गांधीनगर की अदालत उसे दोषी ठहरा चुकी है। ऐसे में पैरोल देने से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

मेडिकल आधार और सुरक्षा का भी दिया गया तर्क
राज्य सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि आसाराम का इलाज चल रहा है और मेडिकल अधिकारी ने उसे पैरोल के लिए पूरी तरह फिट होने का प्रमाण-पत्र नहीं दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका व्यक्त की गई। सरकार का कहना था कि पैरोल के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि अदालत ने इन सभी तर्कों का परीक्षण करने के बाद कहा कि केवल संभावनाओं के आधार पर पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

कोर्ट ने 13 साल के रिकॉर्ड को माना अहम
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आसाराम करीब 13 साल, 1 महीने और 24 दिन से जेल में बंद है। इस दौरान उसे पहले भी अंतरिम जमानत मिल चुकी है, लेकिन उसके द्वारा जमानत या राहत का दुरुपयोग करने का कोई मामला सामने नहीं आया। अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिससे यह साबित हो कि उसने किसी गवाह, पीड़ित पक्ष या समाज के लिए खतरा उत्पन्न किया हो।

इसी आधार पर खंडपीठ ने पुलिस की ओर से जताई गई फरार होने की आशंका को निराधार माना और कहा कि पैरोल से इनकार करने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद नहीं हैं।

इन शर्तों पर मिली 20 दिन की पैरोल
राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपए के दो सक्षम जमानतदारों की शर्त पर मंजूर की है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान में सुनाई गई सजा के संबंध में राजस्थान के पैरोल नियम लागू होंगे, जबकि गुजरात सहित अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की कार्रवाई वहां के कानून के अनुसार चलती रहेगी।

मई में बरकरार रखी थी उम्रकैद की सजा
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद अब पैरोल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीमित अवधि के लिए राहत प्रदान की है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद 87 वर्षीय आसाराम 20 दिन के लिए जोधपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ सकेगा। हालांकि पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद उसे निर्धारित समय पर वापस जेल में आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पैरोल का लाभ केवल निर्धारित शर्तों और नियमों के तहत ही मिलेगा।

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